पवन बसंती संग जब, उडती धूल अबीरआम-बौर, महुआ-महक, तन-मन करे अधीरऋतु बसंत बिखराये जब, उपवन में मकरंदप्रणयनाद कर चूसना, भौंरे करें पसंदठण्ड घटी,गरमी बढ़ी, पवन मचाये शोरटेसू की लाली सजे, जंगल में चहुँओरपकी फसल चारों तरफ़, घर आएगा अन्नहोली पर्व जताए तब, ...
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