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ब्लॉग्स (17)
चारों ओर प्रदूषण का डर । थोड़ा सोचें अपने अन्दर ॥वृक्ष लगायें, कटें न वन । करें न दूषित, धरा-गगन ॥इनको दोस्त बनाना होगा । पर्यावरण बचाना होगा ॥ ----))०((---मन-भावन हरियाले वन । निर्मल जल, स्वच्छंद पवन ॥निर्भय प्राणी करें गमन ।करें न इनका, कभी हनन ॥ ... आगे पढ़ें...

प्राचीन भारत का लिखित-अलिखित इतिहास साक्षी है कि भारतीय समाज ने कभी मातृशक्ति के महत्व का आकलन कम नहीं किया, न ही मैत्रेयी, गार्गी, विद्योत्त्मा, लक्ष्मीबाई, दुर्गावती के भारत में इनका महत्व कम था. हमारे वेद और ग्रंथ शक्ति के योगदान से भरे पड़े हैं. ... आगे पढ़ें...

p>आज हमने अपने मित्र गिरीश बिल्लोरे की पोस्ट पढ़ी , उन्होंने बहुत निर्भयता से बताया कि " मुझे रोकने का किसी के पास कोई अधिकार नहीं है " सच है आप कुछ भी करें , हमारी सेहत पर असर क्यों पड़ेगा. जब आप देश से , अपनी माटी से ... आगे पढ़ें...

पवन बसंती संग जब, उडती धूल अबीरआम-बौर, महुआ-महक, तन-मन करे अधीरऋतु बसंत बिखराये जब, उपवन में मकरंदप्रणयनाद कर चूसना, भौंरे करें पसंदठण्ड घटी,गरमी बढ़ी, पवन मचाये शोरटेसू की लाली सजे, जंगल में चहुँओरपकी फसल चारों तरफ़, घर आएगा अन्नहोली पर्व जताए तब, ... आगे पढ़ें...

आज जब देश के अन्दर और बाहर आतंक को बढावा देने वाले तत्व सक्रिय हैं. हमारे देश के अन्दर ही आतंकी गतिविधियाँ आए दिन बढ़ रहीं हैं. हम जानते भी हैं कि ये विदेशियों की करतूतें हैं , तब भी क्या बिना जयचंदों के इतना सब कुछ सम्भव है ? कब तक महाराणा प्रताप, लक्ष्मी ... आगे पढ़ें...

कुछ दिन पूर्व जब संस्कारधानी जबलपुर में होर्डिंग्स द्बारा यह प्रचारित / प्रसारित किया जा रहा था कि राखी सावंत का स्टेज शो होने जा रहा है तो विनोबा भावे द्बारा दिए गए " संस्कारधानी " नाम को सार्थक करते हुए युवा वर्ग, छात्र संघर्ष समिति और अश्लीलता का ... आगे पढ़ें...

पिछले वर्षों के सभी, मुद्दे और विकल्प पूरा करने के लिए , लेंगे फ़िर संकल्प स्वयं और परिजनों का, करने को उत्कर्ष --------------------... आगे पढ़ें...

आज सुबह से हीहमारे पड़ोसीहो रहे थे परेशानक्योंकि उनके घरआए हुए थेअनचाहे मेहमानपरन्तु उनकी पत्नीकुछ अधिक हीखुश लग रही थीजमीन की छोडियेहवा में उड़ रही थीपति यह तथ्यसमझ ही नही पा रहा थाबस मन ही मनघुटा जा रहा थाआज रोटियों की जगहपूरियाँ बनाई जा रही हैंबिना किसी ... आगे पढ़ें...

अपने मन की,बात बतायेंपरीलोक में,हम चढ़ जाएँलायें वहाँ से,नन्ही परियाँदेख जले फिर,सारी दुनियाहम परियों के,साथ में खेलेंअम्मा-दीदी,रोटि... आगे पढ़ें...

संस्कारधानी जबलपुर ही नहीं अपितु प्रदेश एवं देश के ख्यातिलब्ध व्यंग्यकार डॉ. श्री राम ठाकुर दादा सरलता , सहजता और विनम्रता की प्रतिमूर्ति हैं । साहित्यिक ऊँचाइयों की ओर अबाधगति से अग्रसर, हिन्दी लेखन की बहुआयमी प्रतिभा के धनी डॉ. श्री राम ... आगे पढ़ें...

विश्व शांति के दौर में, आतंकी विस्फोट मानव मन में आई क्यों, घृणा भरी यह खोट विकृत सोच से मर रहे, कितने नित निर्दोष सोचो अब क्या चाहिए, मातम या जयघोष प्रश्रय जब पाते नहीं, ... आगे पढ़ें...

हिरणियों की तरह मैंने भी भरी थी कुलाँचें खेली थी लुकाछिपी माँ को भी दौड़ाया था अपने पीछे जो खिलाना चाहती थी एक निवाला सहेलियों को पीटकर मैं भी दुबकी थी घर के किसी कौने में ... आगे पढ़ें...

हिन्दी साहित्य एवं हिन्दी साहित्यकारों से संबंधित संपूर्ण राष्ट्र में सन्स्कारधानी जबलपुर का नाम रौशन करने वाले डॉ. राज कुमार सुमित्र को नगर का हर बच्चा- बूढ़ा आदर से संबोधित करता है, उनकी सहजता और सरलता ही उनकी पहचान है सत्ताईस मई सन उन्नीस सौ पैंसठ को ... आगे पढ़ें...

वृक्ष बिना स्पंदन रहते खड़े कई पल मौन, पीले पड़ते तन, कपड़ों सी बदलते छाल, निज पर्ण विलग होने का दुख, दे जाता संत्रास... हिल जातीं शाख. फिर लगता बदलेगा जीवन, तभी लेकर नव संकल्प, नव जीवन जीने को आतुर ले अंगड़ाई-सी, तन में भर कर ... आगे पढ़ें...

आप के दिल में खुशी के, रंग भरना चाहता हूँ. ज़िंदगी भर आपके मैं, संग रहना चाहता हूँ.. आकाश में हम कर सकें, मस्ती भरी अठखेलियाँ. पंख बनकर आपके मैं, साथ उड़ना चाहता हूँ.. निर्मल,अनूठे प्रेम का, रिश्ता बनाने के लिए. मैं प्रणय की पत्रिका के, पृष्ठ पढ़ना चाहता ... आगे पढ़ें...

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