चारों ओर प्रदूषण का डर ।
थोड़ा सोचें अपने अन्दर ॥
वृक्ष लगायें, कटें न वन ।
करें न दूषित, धरा-गगन ॥
इनको दोस्त बनाना होगा ।
पर्यावरण बचाना होगा ॥
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मन-भावन हरियाले वन ।
निर्मल जल, स्वच्छंद पवन ॥
निर्भय प्राणी करें गमन ।
करें न इनका, कभी हनन ॥
रुख कठोर अपनाना होगा ।
हरित स्वरूप बचना होगा ॥
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हम सबका हो यही प्रयास ।
कभी न हो जंगल का ह्रास ॥
सृष्टि का ये सृजन अनूप ।
कर न पाये कोई कुरूप ॥
रक्षा भाव जगाना होगा ।
वन अस्तित्व बचना होगा ॥
- विजय तिवारी " किसलय "
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