अपने मन की,
बात बतायें
परीलोक में,
हम चढ़ जाएँ
लायें वहाँ से,
नन्ही परियाँ
देख जले फिर,
सारी दुनिया
हम परियों के,
साथ में खेलें
अम्मा-दीदी,
रोटियाँ बेलें
भूख लगे तब,
घर पर आयें
साथ बैठकर,
खाना खायें
संध्या को वे,
गाना गायें
थपकी देकर,
हमें सुलायें
- विजय तिवारी " किसलय
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