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नवंबर 2008


ब्लॉग्स (3)
आज सुबह से हीहमारे पड़ोसीहो रहे थे परेशानक्योंकि उनके घरआए हुए थेअनचाहे मेहमानपरन्तु उनकी पत्नीकुछ अधिक हीखुश लग रही थीजमीन की छोडियेहवा में उड़ रही थीपति यह तथ्यसमझ ही नही पा रहा थाबस मन ही मनघुटा जा रहा थाआज रोटियों की जगहपूरियाँ बनाई जा रही हैंबिना किसी ... आगे पढ़ें...

अपने मन की,बात बतायेंपरीलोक में,हम चढ़ जाएँलायें वहाँ से,नन्ही परियाँदेख जले फिर,सारी दुनियाहम परियों के,साथ में खेलेंअम्मा-दीदी,रोटि... आगे पढ़ें...

संस्कारधानी जबलपुर ही नहीं अपितु प्रदेश एवं देश के ख्यातिलब्ध व्यंग्यकार डॉ. श्री राम ठाकुर दादा सरलता , सहजता और विनम्रता की प्रतिमूर्ति हैं । साहित्यिक ऊँचाइयों की ओर अबाधगति से अग्रसर, हिन्दी लेखन की बहुआयमी प्रतिभा के धनी डॉ. श्री राम ... आगे पढ़ें...